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  • 3597 GI/2016 (1)

    jftLVªh laö Mhö ,yö&33004@99 REGD. NO. D. L.-33004/99

    vlk/kj.k EXTRAORDINARY

    Hkkx III— [k.M 4 PART III—Section 4

    izkf/dkj ls izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY

    la- 293] ubZ fnYyh] lkseokj] tqykbZ 18] 2016@vk"kk

  • 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

    घ. जब तक इन िविनयम म अ यथा उ लेख नह कया गया हो, ये िविनयम अिधिनयम के अंतगत प रभािषत प म वा य बीमा वसाय करन े वाल े सभी पंजीकृत जीवन बीमाकता , साधारण बीमाकता और

    वा य बीमाकता पर लाग ू ह गे। ये िविनयम जहाँ भी उ लेख कया गया हो, वहाँ सभी तृतीय प बंधक (टीपीए) पर भी लाग ूह गे।

    2. प रभाषाएँ. (i) इन िविनयम म, जब तक संदभ से अ यथा अपेि त न हो,--

    क. "अिधिनयम" से बीमा अिधिनयम, 1938 अिभ ेत ह।ै

    ख. " वा य सेवा करार" से भारतीय बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण (तृतीय प बंधक – वा य सेवाएँ) िविनयम, 2016 म यथाप रभािषत करार अिभ ेत ह;ै

    ग. " ािधकरण" से बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण अिधिनयम, 1999 क धारा 3 क उप-धारा 1 के अधीन थािपत भारतीय बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण अिभ ेत ह।ै

    घ. "आयुष िच क सा" से आयुवद, योग और ाकृितक िच क सा, यूनानी, िस और होिमयोपैथी णािलय के अंतगत दी गई डॉ टरी और / या अ पताल म भत क िच क साएँ िन द ह।

    ङ. "पॉिलसी म मभंग" से समय का वह अंतराल अिभ ेत ह ैजो वतमान पॉिलसी क अविध के अंत म घ टत होता ह,ै जब एक िनि त पॉिलसी पर नवीकरण के िलए िनयत ीिमयम का भुगतान ीिमयम के नवीकरण तारीख को या उससे पहल ेअथवा उस तारीख से 30 दन के अंदर नह कया जाता।

    च. "नकदी रिहत सुिवधा" से बीमाकृत ि को बीमाकता अथवा बीमाकता क ओर से तृतीय प बंधक (टीपीए) ारा दान क जाने वाली वह सुिवधा अिभ ेत ह ैजहाँ पॉिलसी क शत के अनुसार बीमाकृत ि

    ारा कराई गई िच क सा के य के भुगतान बीमाकता ारा, अनुमो दत पूव- ािधकरण क सीमा तक नेटवक दाता को सीधे कये जाते ह।

    छ. "उ पाद दािखल (फाइ लग) करन ेसंबंधी दशािनदश" से वा य बीमा वसाय के अंतगत आन ेवाल ेउ पाद का िवपणन अथवा ताव करन े से पहले बीमाकता ारा अनुसरण क जाने वाली या के संबंध म

    ािधकरण ारा िविन द दशािनदश अिभ ेत ह।

    ज. " वा य बीमा वसाय" से अिधिनयम क धारा 2 (6सी) के अंतगत यथाप रभािषत वा य बीमा वसाय अिभ ेत ह।ै

    झ. "टीपीए ारा वा य सेवाएँ" से भारतीय बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण (अ य़ प बंधक – वा य सेवाएँ) िविनयम, 2016 के िविनयम (3) म िविन द सेवाएँ अिभ ेत ह।

    ञ. " वा य और जीवन संयोजन उ पाद" से वे उ पाद अिभ ेत ह जो जीवन बीमाकता ारा तािवत जीवन बीमा र ा तथा साधारण बीमाकता अथवा वा य बीमाकता ारा तािवत वा य बीमा र ा का सि म ण दान करते ह।

    ट. "नेटवक दाता" से भारतीय बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण (तृतीय प बंधक – वा य सेवाएँ) िविनयम, 2016 म यथाप रभािषत नेटवक दाता अिभ ेत ह।ै

    ठ. " ायोिगक उ पाद" से एक वष क पॉिलसी अविध से यु सीिमत अविध वाला उ पाद अिभ ेत ह ैजो अब तक तािवत न कये गये अथवा वतमान उ पाद म छोड़ दये गये जोिखम को बीमार ा दान करने के िलए

    नवो मेषण हतेु अवसर देने के उ े य से उ पाद ारंभ करन ेक तारीख से पाँच वष से अनिधक अविध के िलए साधारण बीमाकता अथवा वा य बीमाकता ारा िव य के िलए तािवत कया जा सकता ह।ै

  • ¹Hkkx III µ[k.M 4º Hkkjr dk jkti=k % vlk/kj.k 3

    ड. "सुवा ता" (पोटबिलटी) से एक बीमाकता से दसूरे बीमाकता को अथवा एक योजना से उसी बीमाकता क दसूरी योजना म, पहल ेसे चल रही शत और समयब अपवजन के िलए ा साख ( े िडट) को अंत रत करन े के िलए वैयि क वा य बीमा पॉिलसीधारक (प रवार के िलए बीमा आवरण सिहत) को दान कया गया अिधकार अिभ ेत ह।ै

    ढ. "व र नाग रक" से ऐसा कोई ि अिभ ेत ह ैिजसने वा य बीमा पॉिलसी के ारंभ अथवा नवीकरण क तारीख क ि थित के अनुसार साठ अथवा उससे अिधक वष क आयु पूरी क ह।ै

    ण. "िविन द " से अनुसूची-III म सूचीब िवषय पर अथवा इन िविनयम के अंतगत ािधकरण ारा िविन द कये जाने के िलए अपेि त कसी भी अ य िवषय पर इन िविनयम के योजन के िलए प रप , दशािनदश

    अथवा अनुदेश के िनगम ारा समय-समय पर ािधकरण ारा िविन द अिभ ेत ह।ै

    त. "तृतीय प बंधक अथवा टीपीए" से ऐसा कोई भी ि अिभ ेत ह ै जो ािधकरण ारा अिधसूिचत आईआरडीएआई (तृतीय प बंधक – वा य सेवाएँ) िविनयम, 2016 के अधीन पंजीकृत ह ै तथा उन िविनयम म यथाप रभािषत वा य सेवाएँ दान करन ेके योजन के िलए कसी बीमा कंपनी ारा शु क अथवा पा र िमक के िलए िनयु ह।ै

    (ii). इन िविनयम म अप रभािषत, परंत ु बीमा अिधिनयम, 1938 अथवा बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण अिधिनयम, 1999 अथवा उनके अधीन बनाये गये िनयम अथवा िविनयम म प रभािषत श द और

    अिभ ि य के अथ वही ह ग ेजो उन समय-समय पर यथासंशोिधत अिधिनयम , िनयम अथवा िविनयम , म मशः उनके िलए िनधा रत कये गये ह।

    3. वा य बीमा वसाय का पजंीकरण और िव तार

    क. वा य बीमा उ पाद केवल उ ह सं था ारा तािवत कये जा सकते ह जो समय-समय पर यथासंशोिधत बीमा िविनयामक और िवकास ािधकरण (भ

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